Pashupatinath Vrat Vidhi in hindi (पशुपतिनाथ व्रत कैसे करे )
किसी भी व्रत को करने से पहले आपको उस व्रत की सम्पूर्ण जानकारी होना अनिवार्य है की उस व्रत को कैसे करना है उससे क्या लाभ होगा उसके करने के लिए क्या करना होगा | आज हम आपको इस पोस्ट में भागवान पशुपतिनाथ का व्रत कैसे करना है उसके बारे में जानकारी दे रहे है|
pashupatinath vrat vidhi in hindi || पशुपतिनाथ व्रत कैसे करे || pashupatinath vrat vidhi || पशुपतिनाथ व्रत की विधि || पूजा सामग्री की पूरी जानकारी || pashupatinath vrat vidhi in hindi pradeep mishra || pashupatinath vrat vidhi in marathi
![]() |
| pashupatinath vrat vidhi in hindi |
पशुपतिनाथ व्रत से होने वाले लाभ
पशुपतिनाथ व्रत करने से पहले भक्तों को यह पता होना चाहिए कि व्रत करने का अर्थ भूखा – प्यासा रहना नहीं है बल्कि भक्त व्रत को प्राथमिकता इसलिए दे रहा है जिससे वह अपने जीवन में आध्यात्मिक उन्नति कर सकें , प्रभु की भक्ति में लीन हो |
पशुपतिनाथ व्रत की विधि
पशुपतिनाथ व्रत कर के भगवान् शंकर को प्रसन्न किया जा सकता है तथा आप अपनी सभी मनोकामनापूर्ण कार सकते हो |
- पशुपति नाथ जी का व्रत सोमवार को किया जाता है।
- सभी भक्तों को यह ध्यान रखना चाहिए कि पशुपति नाथ जी का व्रत करते समय हमें ब्रह्म मुहूर्त में उठना अति आवश्यक है अर्थात् सुबह 4:00 बजे से 5:00 बजे के बीच ।
- ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर साफ-सुथरे कपड़े पहने ।
- जो भक्त पशुपतिनाथ का व्रत कर रहा हो उसे अपने मन में और मुख से श्री शिवाय नमस्तुभयम का जप करना चाहिए।
- पूजा की थाली में कुमकुम, अबीर ,गुलाल अश्वगंधा ,पीला चंदन ,लाल चंदन और थाली में ऐसा चावल रखें जो खंडित(टुटा-फूटा) ना हो।
- थाली में अगर धतूरा (भगवान शंकर को प्रिय) और आंकड़ा हो तो वह भी रखना चाहिए ।
- भक्तों को यह भी ध्यान में रखना चाहिए कि ये सामान हमें पूजा के लिए शाम को भी लगेगा इसलिए इसकी मात्रा अधिक रखना चाहिए ।
- पूजा की सामग्री, बेलपत्र और थाली लेकर श्री शिवाय नमस्तुभयम का निरंतर जाप करते हुए मंदिर में प्रवेश करना चाहिए ।
- यदि भक्तगण देखते हैं कि शिवलिंग के आसपास सफाई नहीं है तो सबसे पहले भक्तों को सफाई करनी चाहिए
- सफाई करने के बाद शिव की सभी पूजा सामग्रियों का इस्तेमाल करते हुए उनका पूजन करें ,जल और बेलपत्र अर्पित करें।
- भक्तों को यह ध्यान रखना चाहिए कि शिवलिंग का अभिषेक सबसे ऊपरी भाग पर जल डालकर करें।
- जो भी प्रसाद भक्तों ने श्रद्धा पूर्वक बनाया है उसे जलधारी में ना रखें।
- बहुत बार भक्तों के मन में यह संशय होता है कि बेलपत्र पूजा सामग्री का अभिन्न भाग है और बहुत बार यह भक्तों को उपलब्ध नहीं हो पाता है। अगर ऐसी कठिनाई भक्तों के पूजन में आती है तो उसे यह ज्ञात होना चाहिए कि जो बेलपत्र शिवलिंग पर पहले से चढ़ा हुआ है उसे साफ करके भी शिवलिंग को अर्पित किया जा सकता है और जब सुबह की आरती समाप्त हो जाए तो शाम को भी यही प्रक्रिया पुनः करें।
- पूजा की थाली में याद से 6 दिए रखें, जिनमें से 5 दिए भक्तों को मंदिर में प्रज्वलित करना है और एक दिया जो बचा हुआ है उसे घर के दरवाजे के बाहर दाई तरफ प्रज्वलित करें
कितने समय तक पशुपति व्रत किया जाता है
- भक्तों को कम से कम पांच सोमवार तक पशुपतिनाथ का व्रत रखना चाहिए, इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि भक्त 5 सोमवार से अधिक पशुपतिनाथ जी का व्रत नहीं रख सकता।
- जब भक्त सफलतापूर्वक पांचों व्रत कर ले, तो छटवें सोमवार भक्तों को उद्यापन करने की विधि प्रारंभ कर देनी चाहिए।
- उद्यापन के दिवस भक्तों को ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करके पूजा थाली को तैयार रखना चाहिए।
- परंतु उद्यापन के लिए थाली में 108 वस्तुएं रखकर चाहे वह मूंग हो चावल हो मखाने या आदि।
- और अगर भक्त परिस्थितियों का कारण 108 वस्तुएं रखने में समर्थ नहीं है तो जितना श्रद्धा पूर्वक भक्त थाली में सामग्री एकत्रित कर सकता है उतना सामान एकत्रित करें।
- पूर्व व्रत की तरह ही सुबह और शाम को पशुपतिनाथ जी की पूजा करें।
- पूजा करने के पश्चात मंदिर में अपनी इच्छा अनुसार दान करे
- इस दिन आप प्रसाद थोड़ा ज्यादा बनाए ताकि ज्यादा भक्तों को प्रसादी बांटी जा सके।
पशुपति व्रत करते समय इस मंत्र का भी जाप करना चाहिए
।।ओम शिवाय नमस्तुभयम।।

0 Comments